जानिए क्या है मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी?

कोरोना से जंग में एक के बाद एक प्रयोग किए जा रहे हैं, उसी में एक प्रयोग एंटीबॉडी विकसित करने के लिए किया जा रहा है। वो है मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान नई दिल्ली के स्वास्थ्‍य विशेषज्ञ प्रसूच चटर्जी की मानें तो यह थैरेपी कोरोना संक्रमितों को दी जाती है। प्रसार भारती से बातचीत में डॉ. चटर्जी ने बताया कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी को कई रोगों के उपचार में पहले भी इस्तेमाल किया जा चुका है। कुछ-कुछ वायरल बीमारियों में भी इस्‍तेमाल हुई है। इसमें प्रयोगशाला में वायरस के ख‍िलाफ एंटीजेन बनाया जाता है। इसमें संक्रमित को दो इंजेक्शन दिये जाते हैं, जो कोरोना वायरस के प्रोटीन स्पाइक को कमजोर कर देता है। इससे वायरस का लोड कम हो जाता है। इससे मृत्यु दर भी कम हुई है। लेकिन हां, ये सब अभी परीक्षण के तौर पर किया जा रहा है। एंटीबॉडी कितने दिन तक रहते हैं इस पर डॉ. चटर्जी ने बताया कि किसके शरीर में कितने एंटीबॉडी विकसित होंगे और कितने दिन तक बने रहेंगे, यह कहना मुश्किल है। किसी के शरीर में ये एक महीने तक रह सकते हैं, तो किसी के शरीर में तीन से छह महीने तक। ऐसी खबरें आयी हैं कि लोगों को दोबारा कोरोना हुआ और तो और कुछ लोगों को तीन बार कोरोना हुआ। मतलब एंटीबॉडी कितने दिन तक शरीर में रहेंगे कुछ पता पक्का नहीं है। ऐसा मत सोचें कि एक बार कोरोना हो गया तो पुन: नहीं होगा। दोबारा होने में उसके दूसरे स्ट्रेन से संक्रमित हो सकते हैं।

क्या कोरोना के नये स्ट्रेन से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है? 

डॉ. चटर्जी ने बताया कि नये स्ट्रेन को लेकर पैनिक होने की जरूरत नहीं है। यहां तक ब्रिटेन में भी नये स्ट्रेन से मृत्युदर बढ़ी नहीं है। यह जरूर है कि यह 70 प्रतिशत अधिक तीव्रता से फैलता है। बहुत लोग संक्रमित होंगे, तो उसमें अगर मृत्यु हुई, तो कुल मृत्‍यु दर फिर बढ़ेगी। यह स्ट्रेन अलग है, यह फैलता जल्दी है। अगर आप मास्क पहने हैं और दूसरों के साथ दूरी बनाकर रखे हैं, तो इससे भी बच सकते हैं।  उन्‍होंने आगे बताया कि अस्थमा व सीओपीडी के मरीजों को अकसर सांस लेने में तकलीफ होती है। दरअसल वो मास्क लगाने की वजह से नहीं, बल्क‍ि उनके एयर-वे में सेक्रीशन जमा हो जाता है। उसका इलाज ही अलग है। बेहतर होगा ऐसे लोग सर्दियों में बाहर न निकलें। अगर बहुत जरूरी है, तो मास्क की जगह रुमाल या गमछे का प्रयोग कर सकते हैं। भीड़ में जाने से बचें। N95 मास्क या सर्जिकल मास्क में घुटन होती है तो आप कपड़े का मास्क पहनें।

साभार -प्रसार भारती

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