कानपुर। सिर्फ 5 से 10 फीसदी कमीशन और हर महीने 10 से 15 हजार रुपये कमाने का लालच… इसी लालच ने 35 लोगों को ऐसे साइबर नेटवर्क का हिस्सा बना दिया, जिसके जरिए देशभर में करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया जा रहा था। कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने म्यूल बैंक खातों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में इन खातों के जरिए करीब 30 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग (एनसीआरपी) पोर्टल पर दर्ज 100 से अधिक शिकायतों का संबंध सामने आया है। अब पुलिस उस मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है, जिसने लोगों को आसान कमाई का लालच देकर इस पूरे नेटवर्क से जोड़ा।
क्या होता है ‘म्यूल अकाउंट’, जिससे साइबर ठग करोड़ों रुपये घुमाते हैं?
पुलिस के अनुसार म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिन्हें साइबर अपराधी दूसरों के नाम पर इस्तेमाल करते हैं। खाते का मालिक कमीशन या मासिक भुगतान के बदले अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक और बैंकिंग दस्तावेज गिरोह को सौंप देता है। इसके बाद साइबर ठगी से हासिल रकम सबसे पहले इन्हीं खातों में पहुंचती है और फिर कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है, जिससे पैसे के वास्तविक स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
बेरोजगारों, मजदूरों और छोटे दुकानदारों को बनाया निशाना
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह बेरोजगार युवकों, मजदूरों, छोटे दुकानदारों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को हर महीने निश्चित रकम या लेनदेन पर 5 से 10 फीसदी कमीशन देने का लालच देता था। कई खाताधारकों को हर महीने 10 से 15 हजार रुपये तक मिलते थे। नियमित भुगतान मिलने के बाद कुछ लोगों ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों के बैंक खाते भी इस नेटवर्क से जुड़वा दिए, जिससे म्यूल अकाउंट का बड़ा जाल तैयार हो गया।
बेटिंग, गेमिंग और फर्जी निवेश के नाम पर होती थी साइबर ठगी
जांच में पता चला कि साइबर गिरोह ऑनलाइन बेटिंग, गेमिंग एप, फर्जी ट्रेडिंग और निवेश योजनाओं में अधिक मुनाफे का झांसा देकर लोगों से पैसे ठगता था। पीड़ितों की रकम सबसे पहले म्यूल खातों में जमा कराई जाती थी और फिर उसे कई खातों में घुमाकर आगे भेज दिया जाता था, ताकि जांच एजेंसियों को धन का असली स्रोत न मिल सके।
10 थाना क्षेत्रों में कार्रवाई, सबसे ज्यादा शिकायतें रावतपुर और शिवराजपुर से जुड़ीं
पुलिस ने 10 थाना क्षेत्रों में मुकदमे दर्ज किए हैं। शिवराजपुर से 12 आरोपी गिरफ्तार किए गए, जिनके खातों से जुड़ी 21 शिकायतों में करीब 8.88 लाख रुपये की ठगी सामने आई। रावतपुर के एक आरोपी के खाते से जुड़ी 20 शिकायतों में 7.12 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन मिला। बिठूर के चार आरोपियों से जुड़े खातों में 11 शिकायतों के तहत 1.84 करोड़ रुपये से अधिक, पनकी में दो आरोपियों के खातों से 1.16 करोड़ रुपये, चौबेपुर में दो आरोपियों के खातों से 45.67 लाख रुपये, कल्याणपुर, सचेड़ी, अरेल, अर्मापुर और बिधनू थाना क्षेत्रों से भी साइबर ठगी से जुड़े मामले सामने आए हैं।
मास्टरमाइंड की तलाश तेज, दूसरे राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं तार
पुलिस अब उस व्यक्ति की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है, जिसने लोगों को बैंक खाते खुलवाने और उन्हें साइबर गिरोह से जोड़ने का काम किया। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार दूसरे राज्यों में सक्रिय साइबर ठगों से भी जुड़े हो सकते हैं। गिरफ्तार सभी 35 आरोपियों का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है। यह भी जांच की जा रही है कि कौन सिर्फ बैंक खाते उपलब्ध करा रहा था और कौन गिरोह के संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
क्या बोले डीसीपी पश्चिम
पुलिस उपायुक्त पश्चिम एस.एम. कासिम आबिदी ने बताया कि साइबर मुख्यालय के निर्देश पर चलाए गए विशेष अभियान के तहत 35 म्यूल अकाउंट धारकों को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में इन खातों के माध्यम से करीब 30 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन और एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज 100 से अधिक साइबर शिकायतों का संबंध सामने आया है। नेटवर्क के मास्टरमाइंड की तलाश जारी है।






