कानपुर, एक बैंक खाते में आठ करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन और अलग-अलग राज्यों से मिलीं 116 शिकायतें… NCRP पोर्टल की निगरानी में जब पुलिस ने इस खाते की परतें खोलनी शुरू कीं तो साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क सामने आ गया। जांच आगे बढ़ी तो पांच फर्जी फर्मों से जुड़े बैंक खातों में 322 शिकायतें और करीब 250 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विपिन कुमार, शिव प्रताप, राजशेखर और हिमांशु गौतम समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
आठ करोड़ के एक खाते से शुरू हुई जांच
भारत सरकार के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की लगातार मॉनिटरिंग के दौरान पुलिस को कुछ बैंक खाते संदिग्ध मिले। इनमें एक खाते की जांच में करीब आठ करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन सामने आए। इस खाते से जुड़े मामलों में देश के अलग-अलग राज्यों से 116 शिकायतें दर्ज मिलीं। इसके बाद पुलिस ने खाते से जुड़े लोगों, फर्मों और लेन-देन की विस्तृत पड़ताल शुरू की।
पांच फर्जी फर्मों के खातों में 322 शिकायतें
जांच में पता चला कि साइबर फ्रॉड से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए फर्जी फर्मों का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस को ऐसी कुल पांच फर्मों की जानकारी मिली। इनसे जुड़े बैंक खातों पर NCRP पोर्टल के माध्यम से 322 शिकायतें दर्ज मिलीं। इन खातों में करीब 250 करोड़ रुपये की संदिग्ध धनराशि के लेन-देन का पता चला है।
फर्म बनाने से लेकर खाता खुलवाने तक कई लोग शामिल
पूछताछ में सामने आया कि नेटवर्क में फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाने के अलावा दस्तावेज तैयार कराने और किराये पर परिसर उपलब्ध कराने में भी अन्य लोगों की भूमिका रही है। पुलिस अब ऐसे लोगों की पहचान कर उनकी भूमिका की जांच कर रही है।पुलिस टीमें फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही हैं।
करोड़ों की रकम की एक-एक कड़ी जोड़ रही पुलिस
अब पुलिस की जांच का फोकस मनी ट्रेल पर है। बैंक खातों में रकम कहां से आई और किन-किन खातों से होते हुए आगे पहुंची, इसकी पड़ताल की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लेन-देन की और जानकारी सामने आ सकती है।






