कानपुर। कल्याणपुर क्षेत्र के रतन ऑर्बिट में दवा व्यापारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए मृतक के बेटे सुब्रत मिनोचा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, करीब 40 लाख रुपये से अधिक के कर्ज, सट्टा-जुआ और नशे की लत के चलते आर्थिक संकट से जूझ रहे सुब्रत ने अपने पिता से छुटकारा पाने के लिए विशाल गौतम और राजकिशोर के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। पुलिस का दावा है कि सुब्रत ने ही विशाल के माध्यम से फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी बनवाई और शूटरों को सुपारी देकर पांच सितंबर को पिता की हत्या कराई।
पुलिस ने इससे पहले छह सितंबर को मृतक की पुत्रवधू शालू मिनोचा और दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। शुरुआती पूछताछ में विशाल गौतम ने हत्या में शालू की भूमिका बताई थी। हालांकि, आगे की विवेचना, सीसीटीवी फुटेज, वैज्ञानिक साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और आरोपियों की निशानदेही पर हुई बरामदगी के बाद पुलिस ने शालू के खिलाफ घटना में शामिल होने के पुष्टिकारक साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही है। पुलिस के अनुसार, अब तक मिले साक्ष्य हत्या की साजिश में सुब्रत की भूमिका की पुष्टि कर रहे हैं।
पीसीआर में खुली डुप्लीकेट चाबी की कहानी
पुलिस ने विशाल गौतम और राजकिशोर को पीसीआर पर लेकर पूछताछ और साक्ष्य संकलन किया। 23 सितंबर दोपहर 12 बजे से 24 सितंबर दोपहर 12 बजे तक अदालत से मिली पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान विशाल की निशानदेही पर डुप्लीकेट चाबी बनाने वाले व्यक्ति से उसकी पहचान कराई गई। इसके बाद विशाल की निशानदेही पर फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी बरामद की गई। राजकिशोर की निशानदेही पर घटना के समय पहने गए रक्तरंजित कपड़े सेंट्रल रेलवे स्टेशन के पास से बरामद किए गए।
नौकरी से निकाले जाने के बाद भी सुब्रत के संपर्क में था विशाल
पूछताछ में विशाल ने पुलिस को बताया कि वह विनीत मिनोचा की दुकान पर नौकरी करता था। करीब पांच साल पहले उसे नौकरी से निकाल दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद वह विनीत के बेटे सुब्रत के लगातार संपर्क में था। पुलिस के मुताबिक, विशाल ने बताया कि सुब्रत पर सट्टा लगाने, जुआ खेलने और नशे के कारण 40 लाख रुपये से अधिक का कर्ज हो गया था। करीब 55 हजार रुपये की मासिक किस्त के मुकाबले उसे पिता से जीवन-निर्वाह के लिए करीब 40 हजार रुपये ही मिलते थे। पुलिस का दावा है कि आर्थिक तंगी के चलते सुब्रत दुकान से दवाएं निकलवाकर विशाल के माध्यम से बिकवाता था और पैसे हासिल करता था।
संपत्ति दूसरी महिला के नाम होने का था डर
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सुब्रत ने पिता की निजी जिंदगी को लेकर भी नाराजगी जताई। उसने बताया कि पिता का अन्य महिलाओं से संबंध और नशे की आदत से वह परेशान था। उसे आशंका थी कि पिता किसी अन्य महिला से विवाह कर अपनी चल-अचल संपत्ति उसके नाम कर सकते हैं। पुलिस का कहना है कि आर्थिक दबाव और पारिवारिक विवाद के बीच सुब्रत ने पिता को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
चाबी बनवाते समय भी सुब्रत से हुई थी बातचीत
पुलिस ने सुब्रत और विशाल के कॉल डिटेल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। पुलिस के अनुसार, हत्या से पहले दोनों की लोकेशन कई बार एक ही स्थान पर मिली। डुप्लीकेट चाबी बनवाने के दौरान भी विशाल की सुब्रत से बातचीत होना सामने आया। पुलिस का दावा है कि घटना के बाद दोनों ने अपने मोबाइल से चैट और संदेश डिलीट कर दिए थे। सुब्रत ने फ्लैट में घटना के समय प्रवेश करने और बाद में बाहर निकलने वाले लोगों के वीडियो भी देखे, लेकिन पुलिस के अनुसार उसने आरोपियों को पहचानने से इनकार किया।
विशाल ने पकड़े जाने पर पत्नी का नाम लेने की बात बताई
विवेचना में पुलिस को यह भी पता चला कि हत्या की योजना के दौरान सुब्रत ने विशाल से कहा था कि यदि वह किसी मामले में फंस जाए तो उसकी संलिप्तता न बताकर उसकी पत्नी शालू का नाम लिया जाए। पुलिस के मुताबिक, इसी वजह से आरोपियों के पकड़े जाने के बाद विशाल ने पूछताछ में शालू का नाम लिया था। हालांकि, बाद में जुटाए गए साक्ष्यों में पुलिस को शालू की घटना में संलिप्तता के पुष्टिकारक साक्ष्य नहीं मिले।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार, वैज्ञानिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, सीडीआर, बरामदगी और पूछताछ से मिले तथ्यों के आधार पर सुब्रत की भूमिका सामने आई है। इन साक्ष्यों के आधार पर सुब्रत को गिरफ्तार कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।






